Tuesday, June 15, 2021
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खेल उत्पादों के निर्यात पर संकट के बादल

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  • लॉकडाउन के चलते आलओवर होने वाले निर्यात का प्रतिशत गिरा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने एक बार फिर से खेल जगत को संकट में डाल दिया है। खेलों के बंद होने से स्पोर्ट्स इंडस्ट्री पर भी संकट आ गया है। हालांकि यही हालात पिछले साल भी पैदा हुए थे। लेकिन कोरोना महामारी का प्रकोप बीच में कुछ महीनों के लिए बेहद कम हो जाने के कारण कारोबार को भी राहत मिली थी। दुनिया भर में खेलों के शुरू हो जाने से सिर्फ खेल प्रेमियों को ही नहीं बल्कि खेल कारोबारियों को भी खुशी मिली थी, लेकिन एक बार फिर से दुनिया भर में मशहूर मेरठ का खेल उत्पादन बैकफुट पर आने लगा है।

मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स की डिमांड पूरी दुनिया में रहती है। यहां के खेल उत्पादों की कारीगरी और कहीं देखने को नहीं मिलती है। फिर चाहें वह क्रिकेट गुड्स हों या फिर यहां के टेबल टेनिस उत्पाद। लगभग सभी खेलों में मेरठ की छाप जरूर दिखाई पड़ती है। दुनियाभर के क्रिकेटरों की पसंद एसजी और एसएस के बैट यूं ही नहीं बने हैं। लेकिन कोरोना महामारी ने मेरठ की खेल इंडस्ट्री को भी झटका दिया है।

शहर की खेल इंडस्ट्री को हर साल होने वाला मुनाफा इस बार काफी कम हो गया है। वहीं, यहां से निर्यात होने वाले स्पोर्ट्स गुड्स का प्रतिशत भी काफी हद तक गिरा है। गौरतलब है कि महामारी के चलते सभी जगहों पर खेलों को बंद कर दिया गया है।

खेल संस्थान और स्टेडियम बंद किए जा रहे हैं। वहीं, कई बड़े टूर्नामेंट भी एहतियातन रद कर दिए गए हैं। हाल ही में क्रिकेट का त्योहार कहे जाने वाले इंडियन प्रीमियर लीग यानि आईपीएल को भी इसी कारणवश रद किया गया। यही वजह है कि खेल उत्पादों का निर्यात भी कम हुआ है।

कोरोना वायरस की पिछली लहर के बाद इंडस्ट्री का कारोबार एक बार फिर से दुरुस्त होने लगा था। फरवरी और मार्च के माह से सब कुछ सामान्य जैसा लग ही रहा था कि महामारी की दूसरी लहर ने एक बार फिर से कारोबार को चोट मारी है। इन दिनों आउटडोर खेलों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

बताते चलें कि शहर के कई नामी गिरामी ब्रांड जैसे एसजी, एसएस, बीडीएम, स्टैग आदि के खेल उत्पाद कई देशों में निर्यात किए जाते हैं, लेकिन कारोबारियों की माने तो महामारी की वजह से आॅलओवर पूरी इइंडस्ट्री में 90 प्रतिशत तक कारोबार कम हो गया है।

सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट से भी खेल उत्पाद होते हैं निर्यात                    

सूरजकुंड स्थित स्पोर्ट्स मार्केट अपनी अलग पहचान देश विदेश में रखता है। यहां के खेल उत्पाद जहां देश भर में भेजे जाते हैं। वहीं, विदेशों में भी यहां की खेल सामग्री की डिमांड रहती है, लेकिन कोविड काल के दौर में यहां भी कारोबार कम हो गया है।

हालांकि लॉकडाउन के चलते स्पोर्ट्स मार्केट को फिलहाल बंद किया गया है। वहीं, विदेशों में एक्सपोर्ट होने वाले खेल उत्पाद में भी कमी देखने को मिली है। व्यापारियों का कहना है कि एक्सपोर्ट पर अभी सरकार द्वारा कोई रोक नहीं है, लेकिन संक्रमण के चलते काम पर प्रभाव पड़ा है।
कारीगरों की भी भारी कमी

कोरोना महामारी के चलते शहर में काम करने वाले ज्यादातर लोग वापस घर लौटने लगे हैं। ऐसे में शहर में कई व्यापार में कारीगरों की कमी खलने लगी है। स्पोर्ट्स कारखानों में काम करने वाले कारीगरों की संख्या भी इन दिनों कम हो रह है। हालांकि फिलहार खेल उत्पादों की डिमांड कम होने से स्पोर्ट्स गुड्स का उत्पाद भी कम ही किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर जो कारीगर काम भी कर रहे हैं उनमें सभी को एक साथ नहीं बुलाया जाता है। संक्रमण के चलते एक समय में 50 प्रतिशत कारीगर ही काम पर पहुंचते हैं। हालांकि अभी लॉकडाउन के चलते सभी कारोबार बंद हैं।

बनाएं भी तो बेचे कहां

टेबल टेनिस के रैकेट निर्माण में देश दुनिया भर में नाम कमाने वाली फर्म जीकेआई के निदेशक महेश मल्होत्रा साफ तौर पर कहते हैं कि पहले तो रॉ मेटेरियल ही नहीं, फिर भी बनाएं भी तो बेचे कहां। पहले लॉकडाउन की मार झेल रहे खेल कारोबारियों में की तरह महेश भी बताते हैं कि पिछले साल दिसम्बर में थोड़े हालात सुधरे तो लग रहा था कि रैकेट निर्माण का काम फरवरी तक गति पकड़ लेगा, लेकिन कोरोना पार्ट टू के कहर ने सब कुछ फिर बैकफुट पर ला दिया है। महेश बताते हैं कि इम्पोर्ट न के बराबर है। जिला स्तर पर कोई टूर्नामेंट नहीं, स्कूली गतिविधियां ठप्प। नेशनल लेवल पर हालात बदतर, ऐसे में कोई क्या आर्डर दे और क्या भेजे।                                         -महेश मल्होत्रा, निदेशक, जीकेआई फर्म

इंडस्ट्री को नहीं मिला काम

फिलहाल इंडस्ट्री में काम नहीं मिल रहा है। सभी स्पोर्ट्स बंद होने के चलते कमी आई है। जनवरी से लेकर मार्च तक कारोबार में थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन अब आईपीएल भी बंद हो चुका हैं। ऐसे में जब दोबारा स्पोर्ट्स सुचारू होते हैं, तभी काम शुरू होगा। निर्यात में भी 50 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है।                                 -राकेश महाजन, बीडीएम

सेल बिल्कुल न के बराबर

स्पोर्ट्स बंद होने से प्रतिशत काफी कम हुआ है। होने वाली सेल्स बिल्कुल ही न के बराबर है। महामारी के दौर में इस समय स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ऐसे में जब खेल शुरू होंगे तभी इंडस्ट्री को काम मिलेगा। फिलहाल काम नहीं है।
                                                                                                        -पारस आनंद, एसजी

इस बार लेबर काफी कम

जेके एक्सपोर्ट्स फर्म के मालिक का कहना है कि संक्रमण के दौर में कारोबार में कमी आई है। पहले के मुकाबले लेबर काफी कम हो गई है, लेकिन एक्सपोर्ट होने वाला सामान भेजा जा रहा है। हालांकि सप्लाई में कमी देखने को मिली है।

                                                      -अनुज सिंघल, अध्यक्ष सूरजकुंड स्पोर्ट्स गुड्स व्यापार संघ

व्यापार पर संक्रमण का असर

कई देशों में हमारी खेल सामग्री भेजी जाती है, लेकिन संक्रमण के चलते काम काफी धीमा हो गया है। वहीं, सभी स्पोर्ट्स भी बंद हो चुके हैं, जिसके चलते कारोबार काफी हद तक कम हुआ है। -मनोज अग्रवाल, सेल्स मैनेजर नेल्को स्पोर्ट्स

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