Tuesday, December 7, 2021
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प्राइवेट लैब में जांच कराने से लगता है डर

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  • शहर में डेंगू का कहर, लैब की जांच में आ रही अलग-अलग रिपोर्ट, प्लेटलेट्स आ रही कम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना के बाद अब शहर में डेंगू कहर बरपा रहा है। तेजी के डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। इसको लेकर डाक्टर और प्रशासन दोनों अर्ल्ट स्थिति मेें आ गया है। वहीं, दूसरी तरफ डेंगू की जांच के लिए लोग प्राइवेट लैब में जांच कराने से घबरा रहे है। जांच के नाम पर आने वाली रिपोर्ट का डर दिखाकर कुछ नर्सिंग होम वाले मनमानी वसूली कर रहे हैं। जहां एक तरफ स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन दोनों अलर्ट हो वही ऐसी ही पैथोलोजी लैब वाले जांच में खेल कर रहे हैं। अब मरीज जांच कराने से डरने लगा है।

बता दें कि शहर में तीसरी लहर का डर कम और डेंगू का कहर ज्यादा बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों की बात करें तो डेंगू के पॉजिटिव मरीजों की संख्या का आंकड़ा 30 से कम नहीं है। गुरुवार को भी यह आंकडा 33 रहा। डेंगू की जांच के लिए डाक्टर जांच लिख रहे हैं। जांच भी हो रही है, लेकिन जो जांच रिपोर्ट आ रही है। उससे मरीज डर रहे हैं। पैथोलोजी लैब की रिपोर्ट अलग-अलग आ रही है।

गुरुवार को एक अस्पताल के पास खडे मरीज ने नाम न छापने पर बताया कि एक हफ्ते से मरीज भर्ती है तीन बार डेंगू की जांच भी हो चुकी है लेकिन हर बार जांच में कभी प्लेटलेट्स कम तो कभी बढी हुई आ रही है। डेंगू की जांच रिपोर्ट में हो रहे खेल ने लोगों में भय बना दिया है। हालांकि डाक्टरों का कहना है पैथोलोजी लैब पर जांच होती है उसमें यह देख जाता है कि जांच के लिए लिए जाने वाला सैम्पल कब लिया गया कब तक उसे लैब में रखा और कितनी देर बाद उस सैम्पल की जांच हुई।

यही कारण है कि जांच के लिए लिए सम्पल की रिपोर्ट में अंतर आ जाता है। शहर की करीब 250 के करीब रजिस्टर्ड लैब है जहां जांच होती है, लेकिन जिस तरह से जांच रिपोर्ट आ रही है। वह चौकाने वाली है। तेजी से बढ़ रहा डेंगू का कहर और तेजी के साथ घट रही प्लेटलेट्स को लेकर मरीज के साथ ही उसके तीमरदार भी परेशान है।

अब से 10 साल पहले आया था डेंगू, नहीं लगा था डर

डाक्टरों का कहना कि अब से 10 साल पहले यह डेंगू नाम की बीमारी आयी थी तब भी बडी संख्या में डेंगू के मरीज मिले थे। तब लोगों की तेजी से प्लेटलेट्स गिर रही थी, लेकिन लोगों ने इलाज कराया और ठीक हुए, लेकिन इस बार प्लेटलेट्स के नाम पर ही कुछ लैब जो अनाधिकृत रुप से लैबों का संचालन कर रहे हैं और लोगों को प्लेटलेट्स के नाम पर डरा रहे हैं। इसमें कुछ नर्सिंग होम वालों की भी मिलीभगत है, जो ऐसी ही लैबों से जांच कराने के लिए मरीजों को कहते हैं।

झोलाछाप डाक्टर तैयार करते हैं रिपोर्ट

शहर में कुछ लैब ऐसी है जोकि पंजीकृत है, लेकिन वहां डाक्टर कम आते हैं। उनका संचालन झोलाछाप डाक्टर ही करते हैं, बाकी यही सब संचालन करने वाले रिपोर्ट का अपना बनाते हैं। इतना ही नहीं जो झोलाछाप डाक्टर इन लैबों से जुड़ा हैं वह भी अपनी मर्जी की रिपोर्ट निकल कर वादा करता है और बाद में मरीज जो जांच कराता है। उससे मनमाना जांच शुल्क वसूल करता है।

नर्सिंग होम से जी जुडे हैं ऐेसे लैब वाले

बात करें तो शहर कुछ नर्सिंग होम ऐसे हैं जो ऐसी लैब जो बिना डाक्टरों यानि बिना पैथोलोजिस्ट डाक्टरों के संचालित हो रही है वहां से जांच कराने के लिए कहते हैं। जांच में प्लेटलेट्स कम बतायी जाती है और मरीज को नर्सिंग में भर्ती कर वसूली शुरु की जाती है।

पहले भी कई बार हो चुकी है कार्रवाई

शहर में गली-गली परचून की दुकान की तरह ही पैथोलोजी लैब खुल गई है। इन लैबों सैम्पल लेने के लिए रखे गए लोग बिल्कुल अनजान है। न तो सैम्पल लेने आते न ही जांच करनी आती। इलेक्ट्रॉनिक मशीने लगाकर लैब खोली गई। डाक्टरों का कहना है कि गली-गली खुली लैब लोगों को के साथ गुमराह कर रही है। कुछ लैब तो ऐसी है जो सिर्फ सैम्पल लेने के लिए है जांच किसी और लैब कराती है।

अधिकारियों का कहना

ऐसा मामला अभी संज्ञान में आया नहीं है। अगर ऐसा है तो ऐसी लैब जो खून की जांच में गड़बड़ कर रही है उसके खिलाफ अभियान चलाकर उन लैब संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी। डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसमें घबराने की जरूरत नहीं मरीज ठीक होकर अपने घर भी जा रहे हैं।

डेढ़ लाख से साढे चार लाख तक होनी चाहिए प्लेटलेट्स

डाक्टरों का कहना है कि डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो जाती है। प्लेटलेट्स की संख्या डेढ़ लाख से साढ़े चार लाख होनी चाहिए। बावजूद इसके यदि प्लेटलेट्स की संख्या कम हो रही है तो डरने की जरूरत नहीं है इससे मरीज को तेज बुखार तो रहेगा, लेकिन कोई हानि नहीं हो सकती। डा. अनिल नौसरान ने बताया कि कभी कभी प्लेटलेट्स कम होकर 20 हजार 15 भी हो जाती है। जिसे कवर किया जा सकता है।

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