- अरबों रुपयों की संपत्ति बनाई, फिर भाग कर आ गए दुबई
मुख्य संवाददाता |
सहारनपुर: जनपद सहारनपुर मूल के रहने वाले गुप्ता बंधु कभी सहारनपुर महानगर के पुराने शहर में रहा करते थे। मामूली सी गली से निकलकर गुप्ता बंधु सन 1990 के करीब साउथ अफ्रीका पहुंचे और छोटा सा कारोबार क्या शुरू किया कि उनके दिन बहुरने लगे। फिर एक समय ऐसा आया कि दक्षिण अफ्रीका में खनन से लेकर मीडिया तक पर उनका सिक्का चलने लगा। आखिरकार,एनआरआई अजय गुप्ता, राजेश गुप्ता और अतुल गुप्ता ने अपने कारोबार का विशाल साम्राज्य स्थापित कर लिया। जैकब जुमा के राष्ट्रपति रहते हुए वह अकूत संपत्ति के मालिक बन बैठे।
मूलरूप से सहारनपुर के रहने वाले गुप्ता परिवार पर साउथ अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के साथ मिलकर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के संगीन आरोप हैं। हाल ही में गुप्ता बंधुओं को संयुक्त अरब अमीरात से गिरफ्तार किया गया है। इनमें राजेश और अतुल गुप्ता की गिरफ्तारी हुई है, जबकि अजय गुप्ता को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। उल्लेख्रनीय है कि दक्षिण अफ्रीका में अपना कारोबार जमाने वाले और अब दुबई में रहने वाले गुप्ता परिवार मुख्य रूप से सहारनपुर का रहने वाला है।

इस परिवार में तीन भाई हैं। अजय, अतुल और राजेश। 1993 में इनके पिता शिव कुमार ने इन्हें दक्षिण अफ्रीका भेज दिया था। तीनों भाइयों ने जोहान्सबर्ग में सहारा कंप्यूटर्स के नाम से सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी बनाई और उसे काफी आगे बढ़ा दिया। बताते हैं कि साउथ अफ्रीका में जमने से पहले अजय गुप्ता दिल्ली के एक पंच सितारा होटल में एकाउंटटेंट की नौकरी भी की थी। गुप्ता परिवार की दक्षिण अफ्रीका में कई कंपनियां थी और संपत्तियां भी। उस दरम्यान उनकी कंपनियों में दस हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते रहे थे।
2009-2018 के बीच किया जमकर भ्रष्टाचार
अजय, अतुल और राजेश गुप्ता पर आरोप है कि तीनों ने पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के साथ नजदीकी के चलते बड़े पैमाने पर अरबों की स्थानीय मुद्रा का गबन कर लिया। यह सारा भरष्टार 2009 से 2018 के बीच किया गया। हालांकि, घोटालों के सामने आने के बाद वे दक्षिण अफ्रीका से भाग गए। उनके खिलाफ साउथ अफ्रीका में काफी प्रदर्शन भी हुए थे। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने पहली बार यह स्वीकार किया था कि अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के भीतर मतभेदों के कारण देश में घोटाले में कथित तौर पर लिप्त गुप्ता परिवार के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं हो सकी। फिलहाल, अब शिकंजा कस उठा है।

