Thursday, June 18, 2026
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…और जब इस परिवार की खुशियां टूटकर बिखर गईं

माता-पिता के दु:खों का कोई ठोर नहीं                                                 

दो दिन के अंतराल में बुझ गए चिराग                                                   


जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना महामारी में न जाने कितने घरों की चिराग बुझ गए। पल भर में इस परिवार की ऊंचाई छूती खुशियां टूटकर बिखर गई। तबाही के इस मंजर के पीछे कोरोना छोड़ गया जिंदगी भर के लिए रोने का दर्द।

जोफ्रेड और राल्फ्रेड जुड़वा इंजीनियर भाइयों को भी कोरोना ने अपना शिकार बना लिया। एक साथ जन्मे दोनों जुड़वा भाइयों को कोरोना लील गया। दोनों भाइयों की कोरोना संक्रमण के चलते मौत हो गई। दोनों ने कुछ दिन पूर्व ही अपना 24वां बर्थडे मनाया था।

दो जवान बेटों की मौत से माता-पिता ग्रेगरी रेमंड राफेल टूट गए हैं। वे चर्च में जीजस के सामने अब गुमसुम बैठकर अपने दोनों बेटों की याद में आंसू बहा रहे हैं, लेकिन अब आंखे भी पथरा गई हैं और आंसू भी नहीं निकल रहे। ग्रेगरी रेमंड राफेल के दर्द का अंदाजा लगाना बहुत ही मुश्किल है।

जोफ्रेड वर्गीज ग्रेगरी और राल्फ्रेड जॉर्ज ग्रेगरी नाम के दोनों जुड़वा भाई पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। दोनों हैदराबाद की एक कंपनी में नौकरी करते थे। पिता रेमंड के अनुसार उनके बेटों को 24 अप्रैल को तेज बुखार आ गया था। कोरोना संक्रमित होने की वजह से पिछले हफ्ते यानी कि 13 और 14 मई को दोनों की मौत हो गई।

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पिता ने बताया कि उनके दोनों बेटों जोफ्रेड वर्गीज ग्रेगरी और राल्फ्रेड जॉर्ज ग्रेगरी 23 अप्रैल को हैदराबाद से घर आये थे। दोनों बेटों को बुखार के चलते रेमंड अपने घर पर ही उनका इलाज कर रहे थे। उन्हे लगा था कि दोनों का बुखार ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

रेमंड ने कहा कि जब दोनों बेटों का आॅक्सीजन लेवल 90 से नीचे जाने लगा तो डॉक्टर्स ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराने के कहा था। एक मई को रेमंड ने अपने बेटों को आनंद हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।

दोनों की पहली कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उनकी दूसरी आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आ गई। डॉक्टर दोनों को कोरोना वॉर्ड से नॉर्मल वार्ड में शिफ्ट करने की प्लानिंग कर रहे थे।

13 अप्रैल को उन्हें पता चला कि उनके बेटे जोफ्रेड की मौत हो गई है, जिसके बाद उन्होंने अपने दूसरे बेटे को दिल्ली के अस्पताल में जाने की बात की, लेकिन 14 मई को उसने भी दम तोड़ दिया।

दो जवान बेटों को खोने के बाद ग्रेगरी रेमंड बहुत ही दुखी हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे उन्हें एक बेहतर लाइफ देना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि एक टीचर के तौर पर उन्होंने अपने बच्चों को पालने के लिए बहुत ही स्ट्रगल किया। अब उनके बेटे सारी खुशियां उनको वापस लौटाना चाहते थे, इससे पहले ही दोनों की जिंदगी खत्म हो गई।

जीवन भर का दर्द दे गया कोरोना

माता-पिता ने तमाम खर्चों पर कटौती करते हुए अपने जुड़वां पुत्रों को पढ़ा लिखाकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाया था। सपना था कि दोनों बुढ़ापे की लाठी बनेंगे, लेकिन कोरोना ने हंसता-खेलता परिवार खत्म कर दिया।

उन जुड़वां बेटों को निगल लिया, जिनका विदेश में परिवार को शिफ्ट कर शानदार जीवन-यापन करने का सपना था, लेकिन यह सब अधूरा रह गया। दोनों भाई हैदराबाद से विदेश में जॉब तलाश कर वहीं बसने का सपना देख रहे थे। यही बात जुड़वा इंजीनियर की माता-पिता ने कही। माता-पिता को दोनों जुड़वा पुत्रों की मौत ने झकझोर कर रख दिया है।

घर पर इलाज से बिगड़ी हालत

सेंट मेरीज के पास रहने वाले ग्रेगरी रेमंड राफेल और सोजा ग्रेगरी पेशे से शिक्षक हैं। उनके दोनों जुड़वां पुत्रों का इलाज पहले घर पर किया गया, जहां पर उनकी हालत बिगड़ गयी।

अचानक दोनों की आॅक्सीजन लेवल कम होने लगा, जिसके बाद ही उन्हें आनंद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। आॅक्सीजन व बेड नहीं मिलने की खबरों से परिजन घबराये हुए थे।

इसी वजह से घर पर ही इलाज कराया जा रहा था। यदि पहले हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया होता तो छाती में इन्फेक्शन इतना व्यापक नहीं फैलता, जिसे काबू नहीं कर पाते।

मां झूठ मत बोलो…भाई हमें छोड़ गया

दोनों जुड़वा भाई एक दिन जन्में तथा एक-दिन सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर एक ही कंपनी में जॉब की। दोनों एक-दूसरे से जुदा नहीं होते थे। पहले भी बीमार पड़े तो दोनों एक साथ। अब कोरोना संक्रमण हुआ तो एक साथ।

13 मई को जाफ्रेड जिंदगी की जंग हार गए, लेकिन यह बात रालफ्रेडो से उसकी मां ने छुपाई। अगले दिन 14 को रालफ्रेडो ने अपनी मां से पूछा कि मां भाई कहां हैं?

विकट हालात से जूझ रही मां ने अपने बेटे से यह कहकर झूठ बोल दिया कि उसे दिल्ली रेफर कर दिया है। तब राल्फ्रेडो ने मां से कहा कि तुम झूठ बोल रही हो। मुझे महसूस हो गया है भाई हमें छोड़कर चला गया। इसके बाद 14 को ही रालफ्रेडो भी कोरोना से जिंदगी हार गया।

बड़े थे जुड़वा भाइयों के सपने

जुड़वा भाइयों के सपने बड़े थे। उनकी मां बेटों की बात याद कर कहती है कि वे दोनों कोरिया और जर्मनी जाने की प्लॉनिंग बना रहे थे।

माता और पिता को दुनिया का सर्वाधिक सूख देने का हर समय वादा करते थे, लेकिन क्या पता था कि कोरोना उनके सपनों का चकनाचूर कर देगा।

बूढे-मां-बात को ऐसा दर्द देगा, जो कभी खत्म नहीं होने वाला है। सूख देने का वादा करने वाले जुड़वा भाइयों ने भी नहीं सोचा था कि कोरोना उसके माता-पिता को जीवन भर का दर्द दे जाएगा।

बीमार अवस्था में घर इसलिए पहुंचे थे कि मेरठ में उन्हें बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन यहां तो उनकी सांसों की डोर ही टूट गई।


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