Saturday, April 17, 2021
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निजी हाथों में गिरवी रख दी गई पल्हैड़ा शूटिंग रेंज, दम तोड़ रहीं प्रतिभाएं

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  • द्रोणाचार्य स्पोर्ट्स डेवलपमेंट सोसायटी ने शूटिंग छोड़ सिर्फ पैसा कमाया

  • सरकार को सिर्फ 50 हजार सालाना, शूटरों से तीन हजार प्रतिमाह तक वसूल रहे

सागर कश्यप |

मेरठ: पल्हैड़ा शूटिंग रेंज जहां बदहाली के आंसू बहा रही है। वहीं, उभरती प्रतिभाओं के भविष्य पर प्रश्न चिह्न भी लगा रही है। मेरठ जिला राइफल एसोसिएशन के हाथों से लेकर पांच साल पहले जिस द्रोणाचार्य स्पोर्ट्स डेवलपमेंट सोसायटी के हाथों में निशानेबाजी को दिया गया था। उस सोसायटी ने सरकार को 50 हजार रुपये प्रति साल देकर उभरती प्रतिभाओं के भविष्य को गिरवी रख दिया। सोसायटी ने पूरा ध्यान प्रति शूटर तीन हजार रुपये मासिक लेने पर लगाया और पांच सालों में एक भी बड़ी प्रतियोगिताएं कराने की जरूरत नहीं समझी।

मेरठ जिला रायफल एसोसिएशन से लेकर प्राइवेट हाथों में दी गई पल्हैड़ा शूटिंग रेंज निजी हाथों में खेलती रही। कुछ प्रभावशाली परिवारों के बच्चों ने इस पर कब्जा कर लिया और इससे मध्यमवर्गीय परिवारों के प्रतिभाशाली शूटरों का भविष्य अंधकार में आ गया।

एमडीआरए के प्राइवेट हाथों में जाते ही शूटरों को बड़ी प्रतियोगिताओं से वंचित होना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि पूर्व जिलाधिकारी पंकज यादव के कार्यकाल में इस सोसायटी को पांच सालों के लिये एमडीआरए की जिम्मेदारी दी गई थी कि शूटरों को बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी और उनका भविष्य उज्जवल होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सोसायटी पल्हेड़ा शूटिंग रेंज शूटरों से प्रैक्टिस करने के लिये तीन हजार रुपये प्रति माह तक ले रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। ट्रैप शूटिंग रेंज कबाड़ बन गई है और शूटरों को दिल्ली जाना पड़ रहा है। कुछ प्रभावशाली परिवारों ने तो शूटिंग रेंज में अपनी जगह भी बुक कर रखी है और दूसरा उसमें प्रैक्टिस तक नहीं कर सकता है।

सवाल यह उठ रहा है कि जब सोसायटी ने अंधाधुंध पैसा कमा लिया है फिर रेंज का विकास क्यों नहीं किया। हैरानी की बात यह है शासन की तरफ से इसके विकास के लिये बजट भी आया हुआ था। अगर प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दे तो स्टेडियम और पल्हैड़ा में शूटिंग रेंज के दिन बहुर सकते हैं।

कैसे स्वीकृति दे दी एमडीए ने रेंज के पास कालोनी की                      

नियम यह कहता है कि शूटिंग रेंज के निर्धारित दायरे के अंदर आवासीय भवन न बनायें जाएं और न ही कालोनी विकसित की जाए। अफसोस इस बात का है कि मेरठ विकास प्राधिकरण ने सारे नियम और कानूनों को ताक पर रखकर प्राइवेट कालोनी विकसित करवा दी। प्राधिकरण की जानबूझ कर की गई इस लापरवाही का खामियाजा ट्रैप के शौकीन खिलाड़ियों को भारी पड़ा और एक खूबसूरत शूटिंग रेंज खंडहर में तब्दील हो गया। पल्हैड़ा शूटिंग रेंज कई दशकों से चली आ रही है। इसकी ट्रैप रेंज ने ओलंपियन से लेकर इंटरनेशनल शूटर दिये हैं। एमडीए ने प्राइवेट कालोनाइजर पर मेहरबानी करते हुए उसे आवासीय कालोनी की अनुमति दे दी।

इस कालोनी के बनने से सबसे बुरा असर पल्हैड़ा शूटिंग रेंज को हुआ और ट्रैप इवेंट बंद करवा दिया गया। कालोनी वालों की शिकायत थी कि छर्रे उनके घरों में आते है। कालोनी वाले कोर्ट से स्टे ले आए, लेकिन सोसायटी एक बड़ा वकील इसके खिलाफ नहीं खड़ा कर सकी।

हैरानी की बात यह है कि एमडीआरए के पैसे से द्रोणाचार्य स्पोटर्स सोसायटी ने आफिस तक बनवा लिया, लेकिन चार लाख रुपये रेंज को कवर करने के लिये एक दीवार खड़ी करने में नहीं लगाए जिससे छर्रे कालोनी में न जाएं। सवाल यह उठ रहा है कि तत्कालीन कमिश्नर ने भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि शूटिंग रेंज के पास कालोनी की अनुमति कैसे दी गई। पांच सालों में सोसायटी ने भी रेंज के विकास के बजाय अपने विकास पर ज्यादा ध्यान दिया।

खत्म होने के कगार पर ट्रैप शूटिंग, खंडहर में तब्दील रेंज                 

शहर ने कई अंतर्राष्ट्रीय शूटर देश को दिए हैं, जिन्होंने विश्वभर में अपना परचम लहराया है, लेकिन प्रतिभाएं होने के बाद भी सुविधाओं की बात करें तो खिलाड़ियों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। शूटिंग रेंज की बात करें तो यहां पर शूटरों को एक स्विस मशीन पर अभ्यास करने के लिए भी तरसना पड़ता है।

वहीं, पहले से ही मौजूद सुविधाएं रखरखाव के अभाव में बर्बाद होती जा रही हैं। पल्हैड़ा स्थित डबल ट्रैप शूटिंग रेंज इन दिनों बर्बादी की मार झेल रही है। रेंज पर फिलहाल बड़ी घासों के अलावा कुछ नजर नहीं आता है। जबकि यहां पर सालों पर उच्च स्तरीय प्रतियोगिताएं भी आयोजित कराई जा चुकी हैं।

मेरठ जिला रायफल एसोसिएशन के अधीन इस शूटिंग रेंज को पांच सालों पहले निजी हाथों में सौंप दिया गया था। जिसको द्रोणाचार्य स्पोर्ट्स डेवलेपमेंट सोसाइटी के हाथों सौंपा गया था और संस्था ने ही इसके रखरखाव की भी जिम्मेदारी ली थी। संस्था के पांच साल का अनुबंध किया गया था, जोकि 31 मार्च को पूरा हो गया।

इन सालों में शहर को कोई बड़ी प्रतियोगिता तो मिल ही नहीं सकी, साथ ही खिलाड़ी भी सुविधाओं के आभाव में बाहरी शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। दरअसल, पल्हैड़ा की डबल ट्रैप शूटिंग रेंज पिछले कई सालों से बंद पड़ी है। जिसका कारण है कि रेंज से सटाकर ही एक कालोनी काटी गई है।

द्रोणाचार्य स्पोर्ट्स डेवलेपमेंट सोसाइटी के सैयद मोहम्मद फैसल ने बताया कि कालोनीवासियों ने काफी समय पहले रेंज से समस्या होने की बात कही थी। जिसमें उनका कहना था कि रेंज से कालोनी में छर्रे गिरते हैं। जिस कारण डबल ट्रैप शूटिंग रेंज को स्टे दे दिया गया और रेंज पर खिलाड़ियों का आना भी बंद हो गया। ऐसे में आज के समय रेंज की जमीन पर सिर्फ झाड़ियां ही दिखाई देती हैं। साथ ही यहां लगी मशीनों में ही सिर्फ जाले ही लगे हैं।

रेंज बंद होते ही बंद हुआ मेंटेनेंस कार्य                                                

रेंज में करीब तीन से चार साल पहले प्री स्टेट चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। उसके बाद ही रेंज को उक्त मामले के चलते बंद कर दिया गया। ऐसे में तभी से यहां खिलाड़ियों का आना तो बंद हुआ ही साथ ही यहां का मेंटेनेंस कार्य भी रोक दिया गया। कार्यवाही संस्था ने रेंज की मेंटेनेंस को बनाए रखना भी जरुरी नहीं समझा। ऐसे में भविष्य में अब रेंज को यदि दोबारा सुचारु भी किया जाता है तो कड़ी मशक्कत यहां पर करनी होगी।

शूटरों को दिल्ली जाकर करना पड़ता है अभ्यास                                  

डबल ट्रैप शूटिंग में शहर के कई खिलाड़ियों का नाम विश्व स्तर पर जाना जाता है। जिसमें शार्दुल विहान, सैयद रेहानुद्दीन आदि नाम शामिल हैं। लेकिन पिछले पांच सालों में ट्रैप इवेंट की कोई भी प्रतियोगिता यहां नहीं हो सकी है। जबकि बताते चलें कि इसी रेंज पर वर्ष 2002 में नेशनल प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा चुका है। परिणास्वरुप यहां के शॉटगन शूटरों को अभ्यास करने के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। शहर के शूटर दिल्ली जाकर अभ्यास करने के लिए मजबूर हैं।

शूटिंग कॅरियर की शुरुआत में मैं ट्रैप शूटर बनना चाहता था, लेकिन यहां पर सुविधाएं न होने के कारण दूसरे शहरों में ट्रेवल करना पड़ता है। जिस वजह से एयर पिस्टल इवेंट में ही अभ्यास करना शुरु किया, लेकिन अभी भी शहर में उच्च स्तरीय शूटिंग की सुविधाएं नहीं है, जिस वजह से यहां के खिलाड़ियों को बाहर जाना पड़ता है। फिलहाल मैं घर पर रहते हुए ही विश्व कप के लिए अभ्यास कर रहा हूं।  -शहजर रिजवी, अंतर्राष्ट्रीय शूटर (एयर पिस्टल)

पल्हैड़ा की ट्रैप शूटिंग रेंज में नेशनल प्रतियोगिताएं भी हो चुकी है। वहीं, हर साल यहां पर कई प्रतियोगिताएं छोटी-बड़ी आयोजित कराई जाती थी, लेकिन पिछले पांच से छह सालों में यहां से ट्रैप शूटिंग खत्म हो गया है। द्रोणाचार्य को यह रेंज इस शर्त पर दिया गया था, कि वह खेल को निखारेंगे, लेकिन पिछले पांच सालों में यहां कोई प्रतियोगिता नहीं हुई है। ऐसे में अगर कालोनी की समस्या है तो उसके लिए दीवार का भी निर्माण कराया जाना चाहिए था।
-सैयद रेहानुद्दीन, अंतर्राष्ट्रीय ट्रैप शूटर                                

द्रोणाचार्य के साथ किया गया अनुबंध खत्म हो चुका है। संस्था को रेंज बेहतर कंडीशन में दी गई थी, लेकिन इन्होंने ट्रैप को बिल्कुल खत्म कर दिया। ऐसे में एक मीटिंग बुलाई जानी चाहिए और जो भी निर्णय हों वह सर्वसमिति से होने चाहिए।                                                                   -सैयद मोहम्मद हादी, वरिष्ठ सदस्य, एमडीआरए

ट्रैप शूटिंग की बात करें तो मेरठ में कई बड़ी प्रतियोगिताएं हो चुकी हैं, लेकिन निजी हाथों में रेंज जाने के बाद से ही परिस्थितियां बदली हैं। ट्रैप शूटिंग को शहर से बिल्कुल खत्म कर दिया गया हैं। वहीं, अगर रेंज पर स्टे आर्डर है तो मेंटनेंस कार्य जारी रखना चाहिए था।                      -सैयद अली, अंतर्राष्ट्रीय शूटर

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