Tuesday, June 15, 2021
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कोरोना और आंकड़ों को रोकने के लिए सिस्टम का नया फंडा

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना कंट्रोल करने का नया फंडा इजाद किया गया है। इससे कोरोना संक्रमण का ग्राफ भी गिरेगा और सरकार व सिस्टम की जो किरकिरी हो रही है, उसे भी बचा जा सकता है। फंडा यह है कि नगर निगम हो या फिर सीएचसी के डॉक्टरों की टीम, सभी को यह हिदायत दी गई है।

जिस गली-मोहल्लों में कोरोना संक्रमण के लक्षण किसी में मिल रहे है तो उसकी कोरोना संक्रमण की जांच करने की आवश्यकता नहीं, बल्कि उसे सीधे तैयार की गई कोरोना किट थमा दो। ऐसा करने से मरीज भगवान भरोसे बच रहा है तो अलग बात है, लेकिन कम से कम सरकारी आंकड़ों में उसका कहीं नाम आने वाला नहीं है।

पॉजिटिव था या फिर नहीं, यह कहीं भी सरकारी आंकड़ों में उल्लेख नहीं किया जाएगा। नगर निगम अफसरों की मंगलवार को जो मीटिंग हुई हैं, उसमें भी सबसे पहले निगरानी समिति को कोरोना किट कोरोना लक्षण वाले मरीजों को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

क्योंकि निगम की कोई टीम कोरोना की जांच नहीं करेगी, नहीं उसके पास कोई सुविधा है। हालांकि निगम की टीम को कोरोना किट बांटने के लिए उपलब्ध करा दी गई है, ताकि प्रत्येक मोहल्ले व घरों में कोरोना किट बांटी जा सके। इसका डाटा तैयार करने के लिए भी कहा गया है, लेकिन कोरोना की जांच नहीं होगी।

यह डाटा तैयार करने के बाद कहां जाएगा, जब कोरोना की जांच ही नहीं कराई जा रही है। कोरोना किट स्वास्थ्य विभाग ने तैयार की है, जिसको शहर में तो बांटा ही जा रहा है। गांव में भी यहीं फंडा ग्रामीण निगरानी समिति अपनाएंगी। सीएम योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद ही अधिकारी इस अभियान में जुटे हैं।

इससे पहले जांच भी की जा रही थी, लेकिन उनके दौरे से तीन दिन पहले कोरोना टेस्टिंग अचानक कम कर दी गई, जिसके बाद कोरोना पॉजिटिव केस कम हो गए। इसका दावा फिर मुख्यमंत्री ने भी किया कि कोरोना का ग्राफ गिर रहा है। यह अच्छी बात है कि कोरोना का ग्राफ गिरे, लेकिन कोरोना किट बांटने से पहले टेस्ट भी तो होने चाहिए।

मंगलवार को उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 से और 255 लोगों की मौत होना बताया गया, जो सरकारी आंकड़ा है तथा 8737 नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पिछले 24 घंटों में राज्य में कोविड-19 से 255 लोगों की मौत होने के साथ ही संक्रमण से अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 18,072 होना बताया। यही नहीं, मेरठ में 20 लोगों की मौतें होने की पुष्टि की गई।

आंकड़ों का खेल मेरठ ही नहीं, पूरे प्रदेश में चल रहा है। जो लोग घरों पर कोरोना से मर रहे हैं, उनको सिस्टम यह मानने को तैयार नहीं है कि ये लोग कोरोना संक्रमण से मरे हैं,क्योंकि उनकी किसी तरह की जांच ही नहीं कराई गयी है तो फिर इसमें सिस्टम ने एक तरह से अपना बचाव आखिर ढूंढ ही लिया है।

क्योंकि निगम में मंगलवार को जो बैठक हुई, जिसमें निगरानी समिति को यही जिम्मेदारी दी गई कि घर-घर दस्तक दो और लक्षण पता करो। कोरोना के लक्षण है तो कोरोना किट दे दो…इस तरह से अब कोरोना पर नियंत्रण किया जाएगा। इस अभियान में सरकारी अमला लग गया है।

हजारों कोरोना संदिग्ध संक्रमित मरीजों के नहीं लिये गए सैंम्पल

एक तहसील में कम से कम 40 गांव आते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीम सिर्फ दो गांव ही एक दिन में कवर कर पाती है, टेस्टिंग के लिए। इस तरह से तो कम से कम 20 दिन तो गांव को पूरा करने में लग जाएंगे। आखिर मौत कब तक करेंगी इंतजार यह एक बड़ा सवाल है।

कोरोना की भयावह तस्वीर गांवों में अभी भी देखने को मिल रही है। गांवों में जिस राहत की उम्मीद की जा रही थी, अब भी उसका इंतजार ग्रामीण कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में टीम नहीं है। टीम है भी तो वह भी संक्रमित चल रही है।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को जो सुविधा एक साथ प्रत्येक गांव को देनी चाहिए थी, वह नहीं दी जा रही है। क्योंकि कोरोना संक्रमण की जांच की किट एक गांव को दो सौ से ज्यादा नहीं मिल पा रही है। यदि गांव आठ हजार आबादी का है तो उसमें मात्र दो सौ किट से काम चलने वाला नहीं है।

टेस्टिंग गांवों में कम हो पा रही है। एक दिन में एक गांव भी पूरी तरह से नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में गांव के लोग अभी स्वास्थ्य सेवा पाने का इंतजार ही कर रहे हैं। मवाना सीएचसी पर पांच डॉक्टर है, जिसमें से तीन कोरोना संक्रमित है। लैब में एक तकनीशियन है, दूसरा बीमार है।

हस्तिनापुर सीएचसी के खुद प्रभारी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं, जिसके चलते वहां पर इलाज बाधित चल रहा है। बाकी स्टॉफ में तीन लोगों को कोरोना संक्रमण होना बताया गया है। इस तरह से कैसे गांव-गांव व घर-घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती है। इसमें स्वास्थ्य विभाग को पशु पालन विभाग की भी मदद लेनी चाहिए।

क्योंकि, पशुपालन विभाग के पास भी मैनपावर है, जो प्रत्येक गांव-गांव में स्टाफ पशुओं में टीकाकरण करने के लिए जाता है। इनकी मदद ली जा सकती है। हरियाणा भी में पशु पालन विभाग के डॉक्टरों व फॉर्मेसिस्टों को कोरोना संक्रमण रोकथाम करने में सहयोग में लगाया गया है। इस तरह का प्रयोग यहां भी किया जा सकता है।

मवाना, हस्तिनापुर की तरह से सरधना सीएचसी पर भी स्टाफ की कमी है। एक लैब तकनीशियन यहां परहै, जिसके कंधों पर 40 गांव की जिम्मेदारी है। अभी देखा जाए तो दस गांव भी पूरे नहीं हुए हैं, जहां पर टेस्टिंग हो पाई हो। क्योंकि सरधना के ग्रामीण क्षेत्रों के हालात तो और भी भयावह है। खेड़ा, छुर, ईकडी, अलीपुर, मुल्हैडा समेत दर्जन भर ऐसे गांव है, जहां पर कोरोना से सर्वाधिक मौत हुई है।

दौराला सीएचसी क्षेत्र में भी दुल्हैडा में भी बीस लोगों की मौत पन्द्रह दिन के भीतर कोरोना संक्रमण से होचुकी है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है। क्योंकि गांव में जो मौत हो रही है, उनको लेकर मौन साध रखा है। भूडबराल सीएचसी हो या फिर खरखौदा, यहां भी सुविधाएं सिफर है। कोरोना संक्रमण से बचाव से सीमित स्टाफ जूझ रहा है। स्वास्थ्य विभाग कैसे कंट्रोल करेगा, यह बड़ा सवाल है।

इस तरह से हालात और भी खराब होने वाले है। गांवों में घर-घर में ड्रीप लगी हुई है। झोलाछाप डॉक्टर नहीं हो तो व्यापक स्तर पर जिंदगी खत्म हो सकती है। क्योंकि झोला-छाप डॉक्टर ही गांव के लोगों का उपचार कर रहे हैं। बुखार के जो भी मरीज गांव में आ रहे हैं, उन्हें कोरोना किट दी जा रही है।


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