Tuesday, April 28, 2026
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आरटीओ अफसर खामोश! रोक के बाद भी बेरोकटोक दौड़ रहीं डग्गामार बसें

  • योगी सरकार को करोड़ों के राजस्व का फटका, संगठित गिरोह की तर्ज पर डग्गामार बसों का हो रहा संचालन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आरटीओ सरीखे तमाम अफसर खामोश हैं और शासन स्तर से रोक के बावजूद मेरठ से दिल्ली व दूसरे ऐसे रूट जिन पर सरकारी बसें चलती हैं उन तमाम रूटों पर डग्गामार बसें बेरोकटोक चल रही हैं। डग्गामार बसों के संचालन से सूबे की योगी सरकार को हर माह करोड़ों के राजस्व का फटका लग रहा है। मेरठ में ही नहीं पड़ोसी जिला बागपत में भी डग्गामार बसों का संचालक जिस प्रकार से अपराधी तत्व किसी गिरोह को संगठित होकर चलाते हैं, मसलन गिरोह में जब के दायित्व बंटे होते हैं, उसी तर्ज पर मेरठ व बागपत में बस माफिया संगठित गिरोह बनाकर डग्गामार बसों का संचालन करा रहे हैं। आरटीओ आॅफिस के अफसर यदि डग्गामार बसों के खिलाफ ईमानदारी से अभियान चलाए और इनके संचालन पर योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की तर्ज पर कार्रवाई करें तो ना केवल सरकारी रूटों से डग्गामार बसें गायब हो जाएंगे,

बल्कि इससे सरकारी खजाने को भारी राजस्व की प्राप्ति होगी, लेकिन ऐसा होता हुआ लग नहीं रहा है। दिन निकलते ही पूरे महानगर में डग्गामार बसें सड़क पर निकल आती हैं और तो और सबसे हैरानी भरा खुलासा तो यह है कि रोडवेज की बसों से पहले डग्गामार सरकारी रूटों पर अपने फेरे शुरू कर देती हैं। मेरठ में जितनी भी डग्गामार बसें हैं, उन सभी का संचालन संगठित गिरोह की तर्ज पर किया जा रहा है। इसका मुखिया आमतौर पर बस का मालिक होता है। इनके अलावा आरटीओ के अफसर प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इनके बाद रोडवेज अफसरों का भी कम कसूर नहीं और रही सही कसर पुलिस के सहयोग से पूरी हो जाती है।

…तो अवैध संचालक हो रहा अफसरों के इशारे पर

महानगर में तमाम स्थानों से दिन निकलते ही डग्गामार बसों का संचालन शुरू हो जाता है। एक अनुमान के अनुसार डग्गामार 70 से 100 बसें शहर भर में संचालित की जा रही हैं। इनको लेकर जब जनवाणी की टीम ने तहकीकात की तब कहीं जाकर असली खेल का खुलासा हुआ। इस खेल के असली व माहिर मंझे हुए खिलाड़ी आरटीओ के वो अफसर बताए जा रहे हैं। जिनकी जिम्मेदारी इस प्रकार की डग्गामार बसों को रोकने की है,

लेकिन बजाए इन पर कार्रवाई के उनका सारा जोर इन बसों के अवैध संचालन को संरक्षण देने पर है। यहां यह भी स्पष्ट कर देते हैं कि ये डग्गामार बसें अवैध कैसे हैं। ये जितनी भी बसें माफियाओं व अफसरों की मिलीभगत से संचालित की जा रही हैं, इनमें से ज्यादातर आॅल इंडिया परमिट धारी हैं। इसलिए जब भी इन बसों को लेकर तहकीकात की जाती है, तब बताया जाता है कि इनके पास परमिट है, लेकिन यह जानकारी तस्वीर का एक रुख है।

दरअसल, जिस परमिट की जानकारी देकर आरटीओ अफसर बचकर निकल जाते हैं। इन अफसरों की इस चालाकी से पर्दा उठाने का काम भी जनवाणी ने किया है। आॅल इंडिया के जिस परमिट का अधिकारी बार-बार जिक्र करते हैं, लेकिन वो यह नहीं बताते कि आॅल इंडिया का परमिट जिस भी वाहन को जारी किया जाता है, उसके साथ एक शर्त लगी होती है कि जिस रूट पर से सरकारी बसें चलती हैं उन रुटों पर आॅल इंडिया परमिट वाली बसें नहीं चलेंगी, लेकिन ये बसें फिर भी चल रही हैं। ऐसा नहीं कि इससे आॅल इंडिया परमिट जारी करने में अहम् भूमिका निभाने वाले अफसरे बेखबर या अंजान होते हैं।

आरटीओ के अफसर भले ही कुछ भी दावें करें, लेकिन जानकारों का कहना है कि वास्तविकता यह है कि उनकी नॉलेज में सब कुछ होता है और तो और आरटीओ कार्यालय से चंद कदम की दूरी से ही सुबह करीब सात बजे पहली डग्गामार चलती है। इसी प्रकार से शहर के तमाम इलाकों से डग्गामार फर्राटा भरती हैं। इनमें से बड़ी संख्या मेरठ से वाया गाजियाबाद दिल्ली जाने वाली बसों होती हैं। शहर के मेडिकल, तेजगढ़ी, गढ़ रोड गांधी आश्रम, इंदिरा चौक, गंगा प्लाजा, बेगमपुल, जली कोठी चौराहा, केसरगंज महताब मोड़, डीएम कालेज चौराहा, ईदगाह, मेट्रो प्लाजा, शताब्दी नगर व रिठानी तथा परतापुर मोड़ से सवारियों बैठाते हैं।

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