Friday, May 15, 2026
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Tag: संसार

सूर्य और छाता

बाप और बेटा कहीं जा रहे थे। गर्मी के दिन थे। सूरज निकल चुका था। धूप बहुत तेज हो गई थी। बेटे ने छाता...

अध्यात्म का मूल उद्देश्य है आनंद की प्राप्ति

अध्यात्म क्या है? यह जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि क्या अध्यात्म हमारे लिए आवश्यक है अथवा नहीं? हमारे मन की संरचना...

व्यर्थ बातें

एक दार्शनिक तपस्वी की बड़ी ख्याति और प्रसिद्धि थी। सम्राट के मन में जिज्ञासा जागी, ऐसे दार्शनिक से क्यों न मिला जाए? एक आदमी...

जीने की कला

एक आदमी महात्मा कबीर के पास गया और उनसे पूछा, ‘संत जी, यह दुनिया बहुरंगी और मायावी है। इसमें रहकर जीवन कैसे जीऊं?’ कबीर...

नजर का फेर

  रामदास रामायण लिखते जाते और शिष्यों को सुनाते जाते थे। शिष्य बड़े भक्त भाव से रामायण सुनते। हनुमान भी उसे गुप्त रूप से सुनने...

समता ही श्रेष्ठ

अमृतवाणी समता का अर्थ है, मन की चंचलता को विश्राम, समान भाव को जाग्रत और दृष्टि को विकसित करें तो ‘मैं’ के संपूर्ण त्याग पर...
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