Wednesday, May 25, 2022
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बच्चे दीवार फांदकर स्कूल में करते हैं प्रवेश

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  • प्राथमिक स्कूल में गेट के बाहर खड़े होकर बच्चे करते हैं शिक्षकों का इंतजार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: यूपी के बेसिक विद्यालयों में छात्र-छात्राएं मुख्यद्वार से नहीं बल्कि दीवार कूदकर विद्यालय में प्रवेश करते हैं। शनिवार को यह नजारा जनपद के रासना प्राथमिक विद्यालय के स्कूल में देखने को मिला। स्कूल में ताला लगा हुआ था और बच्चे समय से स्कूल में प्रवेश करने के लिए दीवार कूदने को मजबूर नजर आए। जबकि स्कूल के शिक्षक कभी समय पर नहींं आते हैं।

सरकार चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए, लेकिन कुछ शिक्षक सरकार की इस मंशा को पलीता लगा रहे हैं। योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा सुधारने के लिए स्कूलों को हाइटेक किया है, लेकिन रासना गांव के प्राथमिक स्कूल में छात्र बाहर खड़े स्कूल शिक्षकों का इंतजार करते हैं। स्कूल के गेट पर ताला लगा होने की चलते बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर दीवार कूदकर स्कूल में प्रवेश कर रहे हैं।

इस दौरान रासना गांव के अंकित, जगेंद्र, जैकी, कपिल आदि ग्रामीणों ने बताया कि उक्त स्कूल में दो शिक्षक हैं। जिसमें एक महिला व एक पुरुष शिक्षक हैं। दोनों शिक्षक रोजाना ही लेट आते हैं, उन्हें बच्चों की शिक्षा से कोई लेना देना नहीं हैं। मोटा वेतन पाने वाले ये शिक्षक बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त अन्य ग्रामीण भी शिक्षकों के इस लेटलतीफी रवैये और शिक्षा विभाग पर अंगुलियां उठा रहे हैं। वहीं, ग्राम प्रधान अमरीश त्यागी का कहना हैं, इस पर गौर किया जायेगा और दोनों शिक्षकों की शिकायत आलाधिकारियों से की जायेगी। वहीं, इस मामले को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगेंद्र कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन रिसीव नहींं हुआ।

स्कूल का समय साढ़े सात बजे, शिक्षक पहुंचे आठ बजे

जनवाणी संवाददाता विकास खंड रोहटा के रासना प्राथमिक स्कूल में शिक्षा का स्तर जानने के लिये करीब साढ़े सात बजे पहुंचे तो देखा कि करीब दो दर्जन छात्र-छात्राएं बैग लिए बाहर खड़े हैं। जबकि स्कूल के गेट पर ताला लगा हुआ था। 20 मिनट बाद आठ बजे दो शिक्षक वेगन आर गाड़ी से पहुंचे और शिक्षिका द्वारा स्कूल के गेट पर खड़े बच्चों को चाबी देकर ताला खोलने को कहा गया। संवाददाता के पूछने पर भी शिक्षक कोई जवाब नहीं दिया और बिना कुछ कहे अंदर चले गए और मेन गेट बंद कर लिया।

प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था भी है खराब

प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था राम भरोसे है। कहीं स्कूलों की बिल्डिंग जर्जर है, तो कहीं स्कूलों में रंगाई पुताई ही नहींं हुई है, कहीं मिड-डे-मील की गुणवत्ता घटिया हैं, तो कहीं बच्चों को बैठने का फर्नीचर भी नहींं है। बहुत से ऐसे प्राइमरी विद्यालय हैं जहां शिक्षक समय पर स्कूल नहींं पहुंचते है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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