Tuesday, March 9, 2021
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जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए खुली जंग

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  • अध्यक्ष पद के लिए सीट हुई अनारक्षित, भाजपा का दबाव काम आया समीकरण बदलेंगे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिला पंचायत के अध्यक्ष पद को अनारक्षित रखने से तमाम लोगों को हताशा हुई है जो एससी और महिला सीट का ख्वाब लगाकर बैठे हुए थे। दो बार लगातार अनारक्षित रहने के बाद कयास लग रहे थे कि इस बार तस्वीर का रुख बदल जाएगा और जिले की राजनीति एक नये अंदाज में दिखेगी। भाजपा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए मेरठ सीट को अनारक्षित करवा कर समीकरण बदल दिये हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर शुक्रवार को विराम लग गया। हालांकि काफी समय से एससी महिला या ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होने के कयास लगाए जा रहे थे। आरक्षण नीति के अनुसार जो निर्वाचन क्षेत्र अभी तक आरक्षित नहीं रहे हैं, इस बार उन्हें प्राथमिकता से आरक्षित किया जाएगा।

मेरठ जिला पंचायत अध्यक्ष की बात करें तो 1995 में सामान्य महिला के लिए आरक्षित रहा, जबकि वर्ष 2000 में अनारक्षित, 2005 में अनुसूचित जाति, 2010 में पिछड़ी जाति और 2015 में अनारक्षित रहा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष का पद एससी महिला या ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो सकता है। लेकिन इसमें भाजपा के सामने एक पेंच सबसे ज्यादा फंसा हुआ था।

भाजपा शुरु से यही चाह रही थी कि मेरठ सीट आरक्षित न हो क्योंकि पार्टी के पास ऐसी कोई कद्दावर महिला नेता नहीं है जो विपक्ष की महिला नेताओं का मुकाबला कर सके। इसी तरह पार्टी यह भी नहीं चाहती थी कि इसे ओबीसी सीट बनाया जाए। कारण साफ है कि भाजपा में ओबीसी नेताओं की संख्या काफी तादाद है और टिकट के लिये बवाल होना तय था।

वैसे भी पार्टी किसान आंदोलन के कारण किसानों को लेकर काफी चिंतित है और भविष्य में किसी भी प्रकार के बवाल से बचना चाहती थी। वहीं समाजवादी पार्टी पंचायत चुनावों में भाजपा के लिये कड़ी चुनौती पेश करने जा रही है और अगर सीट अनारक्षित न होती तो राजनीतिक समीकरण काफी बदल जाते।

विभागीय कर्मचारी जुटे तैयारी में, निर्वाचन कार्यालय में तैयारी तेज

जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर लगाये जा रहे कयासों पर शुक्रवार को विराम लग गया। शासन की ओर से त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव को लेकर आरक्षण सूची जारी कर दी गई है जिसमें मेरठ में जिला पंचायत अध्यक्ष पद फिर से अनारक्षित हो गया है। साथ ही 479 ग्राम पंचायतों में भी आरक्षण की स्थिति साफ कर दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण नीति लागू होने के बाद शुक्रवार को आरक्षण सूची भी जारी कर दी गई। मेरठ में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद इस बार होने वाले चुनाव में अनारक्षित रहेगा। इसी को लेकर विभाग की ओर से भी तैयारी तेज कर दी गई है। इसी के साथ ग्राम पंचायतों के आरक्षण सूची को भी जारी कर दिया गया है। इसमें 479 ग्राम पंचायतों में अनूसूचित जाति स्त्री के लिये 38, अनुसूचित जाति 67, अन्य पिछड़ा वर्ग स्त्री के लिये 47, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये 80, स्त्री के लिये 76 और अनारिक्षत में 171 पद होंगे।

कई का दोबारा प्रधान बनने का सपना टूटा

आरक्षण सूची जारी होने के बाद से दोबार प्रधान बनने का सपना संजोये बैठे कई ग्राम प्रधानों का सपना शुक्रवार को आरक्षण सूची जारी होने के बाद टूट गया। वर्तमान ग्राम प्रधान आस लगाये बैठे थे कि वह दोबारा से प्रधान बनेंगे। इसकी तैयारी भी ग्रामों में जोरो शोरो से की जा रही थी, लेकिन आरक्षण सूची जारी होने के बाद उनका सपना टूट जाएगा। ग्राम प्रधानों ने चुनावी तैयारी को लेकर अब तक लाखों रुपये खर्च कर दिये थे। गांवों में दावतों को जोर चल रहा था। हर रोज कहीं न कहीं चोपाल लग रही थी, लेकिन आरक्षण सूची जारी होने के बाद से अब उन्हें दोबार से सोचना होगा।

निर्वाचन कार्यालय जुटा तैयारी में

चुनाव को लेकर निर्वाचन कार्यालय में भी तेजी से तैयारी की जा रही है। विभाग की ओर से मतदान केन्द्रों की व्यवस्था बनाने के संबंध में संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये गये थे। जिसे लेकर निर्वाचन कार्यालय की ओर से उनकी आॅनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। मतदान केन्द्रों पर पूरी की जाने वाली व्यवस्थाओं जैसे, बिजली, पानी, फर्नीचर आदि से संबंधित सभी व्यवस्थाओं की जानकारी ली जा रही है।

चुनावी प्रक्रिया पूरी करने को दिये जा रहे नोटिस

जिला प्रशासन की ओर से चुनाव प्रक्रिया को पूरी करने के लिये नोटिस दिये जा रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया में वाहनों की आवश्यकता पड़ती है। जिसके लिये प्रशासन की ओर से प्रत्येक विभाग में नोटिस भेजकर वाहनों की डिमांड की जा रही है। इसके लिये जिलापूर्ति विभाग, आरटीओ समेत कई विभागों को नोटिस भेजकर गाड़ियों की डिमांड की जा रही है।

ग्राम पंचायतों की आरक्षण सूची पर एक नजर

मेरठ में ग्राम पंचायतों की संख्या 479 है जिनमें मेरठ ब्लॉक में 21 ग्राम पंचायतों में से अनुसचित जाती स्त्री के लिये 2, अनुसूचित जाति के लिये 4, अन्य पिछड़ा वर्ग स्त्री के लिये 2, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये 4, स्त्री के लिये 3, अनारक्षित के 6 पद होंगे। जानी खुर्द में 44 ग्राम पंचायतों में 4 अनुसूचित जाति स्त्री, 7 अनुसूचित जाति, 4 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 7 अन्य पिछड़ा वर्ग, 7 स्त्री और 15 अनारक्षित के लिये आरक्षित हैं। रजपुरा के 45 ग्राम पंचायतों में 4 अनुसूचित जाति स्त्री, 7 अनूसूचति जाति, 4 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 8 अन्य पिछड़ा वर्ग, 7 स्त्री और 15 अनारक्षित के लिये आरक्षित हैं। खरखौदा की 30 ग्राम पंचायतों में 2 अनुसूचित जाति महिला, 3 अनुसूचित जाति, 3 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 5 अन्य पिछड़ा वर्ग, 5 स्त्री और 12 अनारक्षित के लिये आरक्षित है। रोहटा ब्लॉक में 39 ग्राम पंचायतों में से 4 अनुसूचित जाति महिला, 6 अनुसूचित जाति, 4 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 6 अन्य पिछड़ा वर्ग, 5 महिला और 14 अनारिक्षत के लिये आरक्षित है। सरधना ब्लॉक में 39 ग्राम पंचायतों में 2 अनुसूचित जाति स्त्री, 4 अनुसूचित जाति, 4 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 6 अन्य पिछड़ा वर्ग, 7 महिला और 16 अनारक्षित के लिये आरक्षित है। सरूरपुर खुर्द में 27 ग्राम पंचायतों में 1 अनुसूचित जाति स्त्री, 2 अनुसूचित जाति, 3 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 4 अन्य पिछड़ा वर्ग, 5 महिला और 12 अनारक्षित के लिये आरक्षित हैं। दौराला ब्लॉक में 45 ग्राम पंचायतों में से 4 अनुसूचित जाति महिला, 7 अनुसूचित जाति, 5 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला,8 अन्य पिछड़ा वर्ग और 6 स्त्री और 15 अनारक्षित के लिये आरक्षित हैं। मवाना ब्लॉक में 47 ग्राम पंचायतों में से 4 अनुसूचित जाति महिला, 8 अनुसूचित जाति, 5 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 8 अन्य पिछड़ा वर्ग, 7 महिला और 15 अनारक्षित के लिये आरक्षित हैं। माछरा ब्लॉक में 42 ग्राम पंचायतों में से 3 महिला अनुसचित जाति, 4 अनुसूचित जाति, 4 अन्य पिछड़ा वर्ग स्त्री, 7 अन्य पिछड़ा वर्ग और 7 महिला और 17 अनारक्षित पदों के लिये आरक्षित है। परीक्षितगढ़ ब्लॉक में 54 ग्राम पंचायतों में से 4 अनुसूचित जाति महिला, 7 अनुसूचित जाति, 5 अन्य पिछड़ा वर्ग म हिला, 9 अन्य पिछड़ा वर्ग और 7 महिला व 20 अनारक्षित के लिये आरक्षित हैं। हस्तिनापुर ब्लॉक में 46 ग्राम पंचायतों में 4 अनुसूचित जाति स्त्री, 8 अनुसूचित जाति, 4 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 8 अन्य पिछड़ा वर्ग, 8 महिला और 14 अनारक्षित के लिये आरक्षित हैं।

भाजपा की साख बचाने को महत्वपूर्ण होगा जिपं अध्यक्ष पद का चुनाव

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में जिला पंचायत सदस्यों का एक एक वोट मायने रखता है। पिछले चुनाव की तरह एक या दो वोटो का अंतर कुछ भी नतीजा सामने ला सकता है। इस बार वार्डों की बात करें तो चुनाव में कुछ भी हो सकता है। पिछले बार जहां क्षेत्र में 34 वार्ड थे इस बार वार्डों की संख्या 33 है। एक वार्ड कम होने के कारण चुनाव के नतीजे कुछ भी हो सकते हैं। पिछले बार के चुनावों में जहां भाजपा में अध्यक्ष पद के लिये आपस में ही घमासान हुआ था वहीं इस बार भी ऐसी ही उम्मीद की जा रही है।

त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव से पूर्व हुए आंशिक परिसीमन के बाद जिला पंचायत वार्डों की संख्या एक कम हो गई है। आने वाले चुनाव में अब 34 के स्थान पर 33 वार्ड होंगे। दो नयी नगर पंचायत बनने के कारण एक वार्ड समाप्त हो गया है। त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव पिछली बार वर्ष 2015 में हुए थे। चुनाव के बाद वर्ष 2017 में जिले में तीन नई नगर पंचायतें बनीं। इनमें हर्रा, खिवाई व शाहजहांपुर शामिल हैं। पिछले पंचायती चुनाव में जिला पंचायत के कुल 34 वार्ड होने से 34 ही सदस्य चुने गये थे। हर्रा खिवाई के नगर पंचायत बन जाने से ग्रामीण आबादी कम हो गई। जिसके चलते वार्ड 13 समाप्त हो गया। जिसके बाद आंशिक परिसीमन के उपरांत अब 34 के बजाये 33 ही वार्ड होंगे।

मुश्किल में थी भाजपा

भाजपाइयों को उम्मीद थी की अनारक्षित पद होने के कारण इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट आरक्षित होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मेरठ में जिला पंचायत अध्यक्ष पद वर्ष 1995 में सामान्य महिला के लिये आरक्षित था, इसके बाद 2000 में अनारक्षित, 2005 में अनुसूचित जाति, 2010 में पिछड़ी जाति और 2015 में अनारक्षित रहा। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही थी कि इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद एससी महिला या ओबीसी महिला के लिये आरक्षित हो सकता है। जिससे भाजपा के लिये मुश्किल खड़ी हो सकती थी, लेकिन इस बार सीट अनारक्षित होने से भाजपाइयों के चेहरे खिल गये हैं।

एक-एक वोट रखता है मायने

वर्ष 2016 की बात करें तो सपा कार्यकाल में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की बात करें तो सपा की सीमा प्रधान ने दो मतों से जीत हासिल की थी। सीमा प्रधान समाजवादी पार्टी के नेता अतुल प्रधान की पत्नी हैं जो हस्तिनापुर दितीय से जिला पंचायत सदस्य हैं। सीमा प्रधान ने बीजेपी प्रत्याशी कुलविन्दर को दो मतों से मात दी थी। सीमा विजयी घोषित हुई थी। इसके बाद 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद सारा खेल ही बदल गया था।

प्रदेश में भाजपा सरकार के आने के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिये दोबारा से चुनाव हुआ। भाजपा के घोषित प्रत्याशी कुलविन्दर ने पार्टी की दूसरी प्रत्याशी सपना हुड्डा को एक वोट से पराजित करके एक वोट से अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया। 34 सदस्य होने के कारण एक को 18 वोट हासिल करने थे। इस बार भी रोमांच और भी अधिक होने वाला है क्योंकि इस बार एक वार्ड कम है। एक एक वोट का क्या फर्क पड़ता है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

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